
SIR के बाद शर्मनाक लापरवाही! रद्दी में बिकी वोटर ड्राफ्ट सूची, लाई-चना के ठेलों तक पहुँचा चुनाव आयोग का दस्तावेज
लखनऊ निर्वाचन तंत्र पर सवाल, लोकतंत्र की नींव माने जाने वाले कागज़ बने मूंगफली के झोले
रिपोर्ट : लखनऊ ब्यूरो
लखनऊ। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए कराई गई SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तत्काल बाद प्रकाशित की गई वोटर ड्राफ्ट सूची की हालत चौंकाने वाली सामने आई है। भारी मेहनत और सरकारी संसाधनों से तैयार की गई यह महत्वपूर्ण सूची कुछ ही दिनों में रद्दी के भाव बेच दी गई और अब उसी कागज से लिफाफे, कागजी झोले और लाई-चना व मूंगफली की पैकिंग की जा रही है।
मामला राजधानी लखनऊ का है, जहां SIR प्रक्रिया के तहत तैयार की गई मतदाता ड्राफ्ट सूची खुलेआम रद्दी वालों के हाथों बिकती हुई पाई गई। फोटो में साफ दिखाई दे रहा है कि चुनाव आयोग का यह संवेदनशील दस्तावेज अब ठेलों पर इस्तेमाल हो रहा है, जिससे इसकी गंभीरता और गोपनीयता दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मतदाता सूची जैसे संवेदनशील दस्तावेज को नष्ट करने की तय प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया? क्या यह लापरवाही है या जानबूझकर की गई अनदेखी? जिस सूची के आधार पर नागरिक अपने नाम, पता और पहचान की पुष्टि करते हैं, वही सूची अब रद्दी बनकर बाजार में घूम रही है।
यह घटना सिर्फ कागज के दुरुपयोग की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा से जुड़ी गंभीर चूक को उजागर करती है। चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना था, लेकिन सूची को इस तरह खुले बाजार में छोड़ देना लखनऊ के निर्वाचन तंत्र की तैयारियों और जवाबदेही पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
फोटो खुद बयान कर रहा है कि जिस दस्तावेज को सुरक्षित रखने और जिम्मेदारी से नष्ट करने की जरूरत थी, वह प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गया। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।