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निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगाम, वेंटिलेटर खर्च बताना अब मजबूरी

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निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगाम, वेंटिलेटर खर्च बताना अब मजबूरी

निजी अस्पतालों पर सख्ती: वेंटिलेटर खर्च की पूरी जानकारी देना अब अनिवार्य

रिपोर्ट: सौरभ गुप्ता

नई दिल्ली। निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर के नाम पर मनमाने खर्च और मरीजों के परिजनों से की जा रही वसूली पर अब लगाम लगेगी। सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अस्पतालों को वेंटिलेटर से जुड़े सभी खर्च पहले ही मरीज के परिवार को बताने होंगे।

नए नियमों के तहत अब किसी भी मरीज को वेंटिलेटर पर रखने से पहले उसके परिजनों से लिखित सहमति लेना अनिवार्य होगा। अस्पतालों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि मरीज को वेंटिलेटर क्यों लगाया जा रहा है, इससे संभावित लाभ और जोखिम क्या हैं तथा कितने समय तक इसकी आवश्यकता पड़ सकती है।

खर्च की पूरी पारदर्शिता जरूरी

निर्देशों के अनुसार, अस्पतालों को ICU और वेंटिलेटर का दैनिक खर्च पहले से बताना होगा। इसके साथ ही मशीन चार्ज, ICU चार्ज, डॉक्टर फीस और अन्य सेवा शुल्क को भी अलग-अलग स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है, ताकि परिजन इलाज का अनुमानित खर्च पहले ही समझ सकें।

बिल में सिर्फ वास्तविक उपयोग का ही शुल्क

सरकार ने यह भी साफ किया है कि वेंटिलेटर का चार्ज केवल उसी समय जोड़ा जाएगा, जब मरीज वास्तव में वेंटिलेटर पर रहेगा। यदि मशीन का उपयोग नहीं हो रहा है, तो उस अवधि का कोई शुल्क बिल में नहीं जोड़ा जा सकेगा।

शिकायत निवारण व्यवस्था भी जरूरी

यदि मरीज या उसके परिजनों को बिल या इलाज को लेकर कोई आपत्ति होती है, तो अस्पताल को सरल और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था उपलब्ध करानी होगी।

मरीज हित में बड़ा फैसला

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन नियमों का उद्देश्य इलाज की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और निजी अस्पतालों में होने वाली मनमानी वसूली पर रोक लगाना है। इससे मरीजों और उनके परिवारों को इलाज से पहले पूरी जानकारी मिलेगी और आर्थिक शोषण से बचाव होगा।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta