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SIR ने हिला दिया बंगाल का सियासी तख़्त!

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SIR ने हिला दिया बंगाल का सियासी तख़्त!

58 लाख वोट कटे — ममता के किले में भी दरार, बीजेपी के गढ़ में भी हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में साइलेंट बम फूट चुका है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत राज्य की वोटर लिस्ट से 58 लाख नाम हटना सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव से पहले सत्ता की शतरंज पर बड़ा दांव है।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि:
👉 जिन इलाकों में सबसे ज्यादा वोट कटे, वे या तो टीएमसी के अभेद्य किले हैं…
👉 या फिर बीजेपी के मजबूत गढ़…..

यानी नुकसान और फायदा — दोनों तरफ बराबर का डर।

1.कोलकाता: ममता के गढ़ में सबसे बड़ा ऑपरेशन

उत्तर कोलकाता

करीब 25% वोटर आउट
लगभग 3.9 लाख नाम कटे — राज्य में सबसे ज्यादा

दक्षिण कोलकाता
करीब 24% वोटर लिस्ट से बाहर
2.16 लाख नाम हटे

भवानीपुर: खुद ममता की सीट पर झटका
कुल वोटर: ~2.06 लाख
हटे नाम: 44,787 (लगभग 21%)

सियासी मायने
कोलकाता में बड़ी संख्या में प्रवासी, किराएदार और मल्टी-लोकेशन वोटर हैं।
अगर कटे नाम टीएमसी के कोर वोट बैंक से जुड़े हैं → ममता की चिंता बढ़ेगी
अगर हिंदी भाषी और शहरी वोटर ज्यादा हटे → बीजेपी को झटका

2.दक्षिण 24 परगना: टीएमसी की रीढ़ पर वार

8.18 लाख नाम कटे
लगभग 10% वोटर लिस्ट साफ
यह वही जिला है जहां
👉 2021 में टीएमसी ने 31 में से 30 सीटें जीत ली थीं

खतरा कहां?
मुस्लिम और सुंदरबन क्षेत्र की आबादी
डायमंड हार्बर जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके
अगर यहां वोटर कटे हैं तो टीएमसी के सेफ मार्जिन पर सीधा असर।

3.उत्तर 24 परगना: मतुआ फैक्टर पर नजर

7.92 लाख नाम कटे
लगभग 9.5% कटौती

यह जिला टीएमसी की बड़ी जीत और बीजेपी की सीमावर्ती पकड़ — दोनों का मिश्रण है

सस्पेंस
अगर मतुआ समुदाय प्रभावित → बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बनाएगी

अगर सीमावर्ती मुस्लिम इलाके प्रभावित → टीएमसी दबाव में

4.मुर्शिदाबाद: अल्पसंख्यक बहुल, लेकिन सेंध

2.78 लाख नाम कटे
प्रतिशत कम, असर बड़ा

कभी कांग्रेस का किला, अब टीएमसी का भरोसेमंद इलाका।
यहां वोट कटना हमेशा नागरिकता और घुसपैठ जैसे मुद्दों को हवा देता है।

5.पश्चिम वर्धमान: हिंदी बेल्ट में भारी कटौती

13% वोटर गायब
3 लाख से ज्यादा नाम कटे

संकेत साफ
प्रवासी मजदूर
औद्योगिक पलायन
‘घोस्ट वोटर’ सफाई

परंपरागत रूप से बीजेपी समर्थक माने जाने वाले वोटरों पर असर पड़ा तो बीजेपी की मुश्किल बढ़ सकती है।

6.उत्तर बंगाल: बीजेपी के पावर ज़ोन में हलचल

दार्जिलिंग: 9.45% कटौती
जलपाईगुड़ी: 6.9%
कूचबिहार: 4.5%

राजनीतिक खतरा
गोरखा
राजबंशी
चाय बागान मजदूर

यह बीजेपी का सबसे मजबूत इलाका है। यहां वोट कटे तो अस्मिता और पहचान का मुद्दा उठेगा।

7.पूर्व मेदिनीपुर: शुभेंदु को राहत, ममता को झटका

पूरे जिले में सिर्फ 3.3% कटौती
नंदीग्राम बनाम भवानीपुर
नंदीग्राम: सिर्फ 10 हजार नाम कटे
भवानीपुर: 44 हजार से ज्यादा

साफ संदेश
जहां शुभेंदु का किला मजबूत दिखा,
वहीं ममता के गढ़ में सबसे बड़ी सर्जरी हुई।

8.जंगलमहल: आदिवासी इलाकों में चुनावी गेमचेंजर

पुरुलिया: 7.5% कटौती
बांकुरा और पश्चिम मेदिनीपुर भी प्रभावित
यहां 2021 में जीत-हार का अंतर हजारों वोटों का था।
ऐसे में लाखों नाम कटना — पूरा गणित बदल सकता है।

निष्कर्ष: SIR किसे खुश कर गया?

👉 टीएमसी के मजबूत इलाकों में भारी नुकसान
👉 बीजेपी के गढ़ों में भी बेचैनी

यानि:-
❌ कोई सीधी जीत नहीं
❌ कोई साफ हार नहीं

लेकिन एक बात तय है :—
2026 से पहले बंगाल की राजनीति अब वैसी नहीं रहेगी जैसी थी।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta