11 सालों में भी न बना एक भी विकसित गांव और न ही बन सकी एक भी स्मार्ट सिटी: सांसद नीरज मौर्य
रिपोर्ट: सौरभ गुप्ता
दिल्ली/बरेली! आंवला के सांसद नीरज मौर्य ने वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने के अवसर पर सदन में बोलते हुए माननीय अध्यक्ष महोदय का धन्यवाद दिया और बंकिम दा को नमन करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय गीत 150 साल से देश के कोने‑कोने में लोगों के हृदय में वास कर रहा है। उन्होंने वंदे मातरम में वर्णित सुजल भूमि, सुफल भूमि और मलय पर्वत की ठंडी हवाओं, लहलहा फसलों से ढकी जननी की कल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वही अन्नदाता किसान ऋण के बोझ से दबा परेशान है और आत्महत्या की घटनाएं मन को आहत करती हैं। सांसद ने कहा कि गीत में जिन पहाड़ों की कल्पना की गई है, आज वहां तरह‑तरह की त्रासदियां और प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल रही हैं, इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे हादसों से देश को बचाने के लिए ठोस रोड मैप तैयार करे। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश के करीब 70 प्रतिशत लोगों को स्वच्छ जल नहीं मिल रहा, जबकि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई हर घर जल, हर घर नल योजना में भ्रष्टाचार की दीमक लग गई है और इस पर भी सदन में गंभीर चर्चा कराकर इसे ज़मीन पर सही रूप में लागू किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को स्वच्छ जल मिल सके। मौर्य ने अपने संबोधन में नौजवानों को रोजगार न मिलने, नई पीढ़ी को शिक्षा और चिकित्सा न मिल पाने तथा मूलभूत सुविधाओं से वंचित किए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा की 2047 तक विकसित भारत बनाने की बात कही जाती है, तब स्थिति यह है कि इन 11 सालों में न एक विकसित गांव बन पाया है और न ही एक स्मार्ट सिटी, इसलिए वंदे मातरम पर चर्चा के साथ‑साथ इन बुनियादी मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करना समय की मांग है।