
रक्षाबंधन समारोह में मेयर के बाउंसर की दबंगई! मेयर की बहन के मुंह पर लगा हाथ/घूँसा, खून निकलने पर भी खड़ी रहीं बेचारी बुजुर्ग महिला
“राखी बांधने आईं बहन, बाउंसर के हाथ से निकला खून! मेयर के कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल”
“मेयर के रक्षाबंधन समारोह में बाउंसर की दबंगई? बुजुर्ग महिला के मुंह से निकला खून”
“बहनों के सम्मान के कार्यक्रम में अपमान का आरोप, बाउंसर के हाथ से घायल हुई बुजुर्ग महिला!”
“हजारों बहनें, भारी सुरक्षा और फिर भी बवाल—बाउंसर के हाथ से बुजुर्ग महिला के मुंह से निकला खून”
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के पवित्र पर्व पर आयोजित समारोह में सुरक्षा के नाम पर तैनात बाउंसरों के रवैये ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बरेली क्लब में मेयर डॉ. उमेश गौतम और पार्थ गौतम की ओर से आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में उस समय अफरातफरी जैसी स्थिति बन गई, जब एक बुजुर्ग महिला के मुंह पर कथित तौर पर बाउंसर का हाथ लग गया। महिला के मुंह से खून निकलने लगा, लेकिन मौके पर उनकी सुनने वाला कोई नजर नहीं आया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं राखी बांधने पहुंची थीं।
राखी बांधने के बाद बहनों को उपहार भी दिए जा रहे थे। इसी दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में लगे बाउंसरों के व्यवहार को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि भीड़ के बीच एक बुजुर्ग महिला के चेहरे पर बाउंसर का हाथ लग गया। चोट लगने के बाद महिला के मुंह से खून निकलने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक महिला कुछ देर तक अपने मुंह से निकल रहे खून को साफ करती हुई वहीं खड़ी रहीं। कथित घटना के बाद वह न तो किसी से उलझीं और न ही कोई हंगामा किया। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी भीड़ और बड़े आयोजन के बीच एक बुजुर्ग महिला की परेशानी पर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं पड़ी?
सुरक्षा के नाम पर तैनाती, लेकिन व्यवहार पर कौन रखे नजर?
बड़े आयोजनों में बाउंसरों की जिम्मेदारी भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है। लेकिन यदि भीड़ नियंत्रण के दौरान किसी बुजुर्ग महिला के चेहरे पर चोट लगने जैसी स्थिति पैदा हो जाए तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी बाउंसरों के कथित रवैये को लेकर नाराजगी दिखाई दी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भीड़ संभालने के नाम पर बाउंसरों को लोगों से मनमाना व्यवहार करने की छूट दी गई थी? अगर नहीं, तो कथित घटना के बाद जिम्मेदार आयोजकों ने मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया?
हजारों बहनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल!
रक्षाबंधन का आयोजन बहनों के सम्मान और स्नेह के लिए किया गया था। ऐसे में किसी महिला के घायल होने की शिकायत सामने आना आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। भीड़ का दबाव पहले से अनुमानित था, फिर भी बाउंसरों के व्यवहार और भीड़ प्रबंधन को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता बरती गई या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
घटना को लेकर आयोजकों की ओर से तत्काल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ऐसे में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि बड़े नाम और बड़ा मंच होने के बावजूद आम लोगों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?