
उर्स-ए-रजवी के मंच से बड़ा संदेश: दहेज में लाखों लुटाने के बजाय बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करें पैसा
दहेज मांगने वालों का निकाह नहीं पढ़ाएंगे मौलाना-काजी, उर्स में समाज सुधार का बड़ा आह्वान
बेटियों की तालीम, सादगी की शादी और नशे से दूरी… उर्स-ए-रजवी के मंच से उठी बदलाव की आवाज
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के 108वें उर्स-ए-रजवी में धार्मिक संदेशों के साथ समाज सुधार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उर्स के मंच से उलेमा-ए-किराम ने मुस्लिम समाज से दहेज और शादी-ब्याह में होने वाली फिजूलखर्ची से बचने की अपील की। कहा गया कि शादी में दिखावे पर बड़ी रकम खर्च करने के बजाय बच्चों की शिक्षा, विशेषकर बेटियों की तालीम पर पैसा लगाया जाए। उलेमाओं के मुताबिक, शिक्षा ही किसी समाज की मजबूत तरक्की की बुनियाद बन सकती है।
दहेज मांगने वालों के निकाह से दूरी का ऐलान
उर्स के मंच से दहेज प्रथा के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि यदि लड़के पक्ष की ओर से दहेज की मांग की जाती है तो ऐसे विवाह में मौलाना या काजी निकाह पढ़ाने से परहेज करें। लोगों से भी दहेज मांगने वाले परिवारों का सामाजिक रूप से विरोध करने की अपील की गई।
उलेमाओं ने कहा कि दहेज के नाम पर होने वाला खर्च गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। बेटियों की शादी को लेकर परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। ऐसे में समाज को इस कुरीति के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा।
दहेज की नुमाइश नहीं, सादगी से हो निकाह
मंच से शादी समारोहों में होने वाले दिखावे और अनावश्यक खर्च पर भी चिंता जताई गई। कहा गया कि माता-पिता अपनी बेटी को अपनी क्षमता के अनुसार उपहार देना चाहें तो दें, लेकिन उसका प्रदर्शन करने से बचें। महंगे आयोजन और रस्मों के बजाय सादगी से निकाह को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।
उलेमाओं ने दिन में सादगी के साथ निकाह करने की परंपरा को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि विवाह समारोह में होने वाले गैरजरूरी खर्च को कम किया जा सके और परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
गरीब बेटियों के सामूहिक निकाह पर जोर
उर्स के मंच से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए सामूहिक निकाह आयोजित करने पर भी जोर दिया गया। दरगाह से जुड़ी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से ऐसे आयोजनों को बढ़ाने की अपील की गई, ताकि आर्थिक तंगी किसी गरीब परिवार की बेटी के विवाह में बाधा न बने।
युवाओं को नशे से बचाने की अपील
उर्स में युवाओं में बढ़ती नशाखोरी का मुद्दा भी उठाया गया। उलेमाओं ने कहा कि नशे की लत केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने, उन्हें बेहतर माहौल देने और शिक्षा से जोड़ने की अपील की गई।
धार्मिक आयोजन के साथ समाज सुधार का संदेश
108वें उर्स-ए-रजवी के मंच से इस बार दहेज प्रथा, शिक्षा, सादगीपूर्ण विवाह और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर भी लोगों को जागरूक किया गया। उलेमाओं ने कहा कि समाज की वास्तविक मजबूती केवल धार्मिक गतिविधियों से नहीं, बल्कि शिक्षा, अच्छे संस्कार और सामाजिक बुराइयों से दूरी बनाने से आएगी।
लाखों अकीदतमंदों की मौजूदगी में दिए गए इन संदेशों के जरिए आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए लोगों से अपने स्तर पर पहल करने का आह्वान किया गया।