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मरे हुए डॉक्टर के नाम पर चल रहा मर्शी हॉस्पिटल! पीलीभीत में स्वास्थ्य विभाग का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ उजागर 

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मरे हुए डॉक्टर के नाम पर चल रहा मर्शी हॉस्पिटल! पीलीभीत में स्वास्थ्य विभाग का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ उजागर 

‘मर्सी अस्पताल’ में एक साल तक मौत के साए में होता रहा इलाज, मृत डॉक्टर के नाम पर मिलता रहा लाइसेंस, झोलाछापों ने संभाली मरीजों की जिंदगी

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

पीलीभीत। जिले के बीसलपुर से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां ‘मर्सी अस्पताल’ पूरे एक साल तक ऐसे डॉक्टर के नाम पर संचालित होता रहा, जिनकी मौत काफी पहले हो चुकी थी। इससे भी हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने मृत चिकित्सक के नाम पर अस्पताल का पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया, लेकिन किसी अधिकारी ने यह तक जांचने की जरूरत नहीं समझी कि जिस डॉक्टर के नाम पर अस्पताल चल रहा है, वह जीवित भी हैं या नहीं।

जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ निवासी स्वर्गीय डॉ. सैयद अली ज़हीर ज़ैदी के नाम पर अस्पताल के दस्तावेज तैयार किए गए और स्वास्थ्य विभाग ने बिना भौतिक सत्यापन के फाइल पर मुहर लगा दी। नियमों के मुताबिक अस्पताल का पंजीकरण करने से पहले संबंधित चिकित्सक की उपलब्धता और सत्यापन अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में नियमों को कथित तौर पर ताक पर रख दिया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरे एक साल तक अस्पताल में किसी वैध चिकित्सक की मौजूदगी नहीं थी। मरीजों का इलाज कथित झोलाछाप लोगों के भरोसे चलता रहा और लोगों की जान से खुलेआम खिलवाड़ होता रहा। यही नहीं, अस्पताल परिसर में बिना पंजीकरण के कथित तौर पर अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर भी संचालित किया जाता रहा, जहां प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जगह अप्रशिक्षित लोग जांच करते पाए गए।

अब जब अस्पताल के पंजीकरण की अवधि समाप्त हो चुकी है, तो फर्जीवाड़े के आरोपी दोबारा नवीनीकरण कराने की कोशिश में जुटे बताए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि मृत डॉक्टर के नाम पर एक साल तक अस्पताल चलता रहा तो स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण, सत्यापन और निगरानी तंत्र का क्या हुआ? क्या अधिकारियों की लापरवाही थी या फिर किसी की मिलीभगत?

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

बड़े सवाल :-

मृत डॉक्टर के नाम पर अस्पताल का लाइसेंस कैसे जारी हुआ?

भौतिक सत्यापन किए बिना किसने फाइल पास की?

एक साल तक झोलाछापों के भरोसे इलाज चलता रहा, जिम्मेदार कौन?

अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

नवीनीकरण की कोशिश के पीछे किसका संरक्षण है?

 

👆भर्ती मरीज👌 

👆फर्जी मर्सी हॉस्पिटल: फर्जी डॉक्टर👆

👆अनट्रेंड स्टाफ👆 

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta