
लोकसभा में गूंजा किसानों के KCC ऋण का मुद्दा: सांसद नीरज मौर्य के सवाल पर केंद्र सरकार का बड़ा जवाब
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
नई दिल्ली/बरेली, 3 अगस्त। लोकसभा में बरेली के सांसद नीरज मौर्य ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण मिलने में आ रही समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने वित्त मंत्रालय से पूछा कि क्या छोटे किसानों को 4 प्रतिशत प्रभावी ब्याज दर वाले KCC ऋण, CIBIL स्कोर और नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जैसी शर्तों, ऋण नवीनीकरण में देरी, किसान ऋण पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों तथा फसल ऋण के साथ जबरन बीमा पॉलिसी थोपने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित उत्तर में बताया कि आरबीआई के 28 जनवरी 2015 के सर्कुलर के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के ऋण के लिए ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ मांगने के लिए बाध्य नहीं हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड सहित किसी भी ऋण के लिए न्यूनतम CIBIL स्कोर अनिवार्य नहीं किया है। ऋण स्वीकृति का निर्णय संबंधित बैंक अपनी नीतियों और नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुसार लेते हैं।
ऋण नवीनीकरण के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा की समीक्षा बैंक की नीति और किसान के पुनर्भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर की जाती है। उत्तर प्रदेश की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) ने बैंकों को समय पर KCC ऋण के नवीनीकरण के निर्देश दिए हैं।
किसान ऋण पोर्टल (KRP) पर तकनीकी दिक्कतों के संबंध में सरकार ने बताया कि सितंबर 2023 में शुरू किए गए इस पोर्टल से आधार आधारित सत्यापन और ब्याज अनुदान तथा प्रॉम्प्ट रिपेमेंट इंसेंटिव के दावों के निपटान में पारदर्शिता और गति बढ़ी है।
जबरन बीमा पॉलिसी बेचने पर सख्त चेतावनी
फसल ऋण के साथ जबरन बीमा या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने के मामले में सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से लागू आरबीआई के संशोधित निर्देशों के तहत बैंकों द्वारा किसी भी वित्तीय उत्पाद या सेवा की अनिवार्य बंडलिंग पर रोक है। यदि ग्राहक की शिकायत पर गलत तरीके से बीमा या अन्य उत्पाद बेचना सिद्ध होता है, तो बैंक को पूरी राशि वापस करनी होगी और ग्राहक को हुए नुकसान की भी भरपाई करनी होगी।
यह जवाब किसानों को राहत देने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट हो गया है कि बैंक मनमाने ढंग से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं मांग सकते और न ही फसल ऋण के साथ जबरन बीमा बेच सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में छोटे किसानों को 4 प्रतिशत की प्रभावी ब्याज दर वाले किसान क्रेडिट कार्ड ऋण प्राप्त करने में आ रही दिक्कतों, बैंकों द्वारा सीआईबीआईएल स्कोर व नो-ड्यूज सर्टिफिकेट की कड़ी शर्तों, ऋण नवीनीकरण में देरी और किसान ऋण पोर्टल पर डेटा फीडिंग में तकनीकी बाधाओं को लेकर आ रही तकनीकी दिक्कतों और फसल ऋण स्वीकृत करते समय जबरन बीमा पॉलिसी थोपने वाले बैंकों पर दंडात्मक कार्रवाई को लेकर लोकसभा में सांसद नीरज मौर्य ने वित्त मंत्रालय से सवाल पूछे थे।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में स्पष्ट किया गया कि 28 जनवरी 2015 के आरबीआई सर्कुलर के तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के ऋण के लिए नो ड्यू सर्टिफिकेट मांगने से छूट दी गई है।
फसल ऋण के साथ जबरन बीमा पॉलिसी थमाने के मामले पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए बताया कि बैंकों द्वारा किसी भी अन्य वित्तीय उत्पाद/सेवा की अनिवार्य बंडलिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यदि ग्राहक की शिकायत पर गलत तरीके से उत्पाद बेचने का मामला साबित होता है, तो बैंक को पूरा पैसा वापस लौटाना होगा और ग्राहक के नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।