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बरेली दंगा प्रकरण: झुमका तिराहे से उठी असलहों की खेप, मौलाना के मददगार और दंगे की साजिश का एक और चेहरा मुदस्सिर मिर्जा उर्फ गोलू बेनकाब

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बरेली दंगा प्रकरण: झुमका तिराहे से उठी असलहों की खेप, मौलाना के मददगार और दंगे की साजिश का एक और चेहरा मुदस्सिर मिर्जा उर्फ गोलू बेनकाब

वीडियो कॉल से हुई पहचान, पुलिस पर चली थीं उसी खेप की गोलियां

पार्षद अनीस सकलेनी के साथ मिलकर उठाया गया था असलहा, मददगार मुदस्सिर मिर्जा उर्फ गोलू गिरफ्तार

कानपुर प्रकरण की आड़ में भड़का था बरेली, अब खुल रही परत-दर-परत साजिश

सीसीटीवी बना गवाह, नेटवर्क का राज उगल रहा आरोपी

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली, 22 अप्रैल 2026। शहर को दंगों की आग में झोंकने वाली साजिश की परतें अब तेजी से खुल रही हैं। पुलिस जांच में एक और अहम कड़ी सामने आई है। दंगे में इस्तेमाल असलहों की सप्लाई से जुड़ा आरोपी मुदस्सिर मिर्जा उर्फ गोलू आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

पूछताछ में सामने आया कि उसने झुमका तिराहे से असलहों की खेप पार्षद अनीस सकलैनी के साथ मिलकर उठाई थी। अनीस पहले से ही इस मामले में जेल में बंद है। पुलिस का दावा है कि दंगे के दौरान जो गोलियां चलीं, वही असलहे इसी खेप से आए थे।

कानपुर का बहाना, बरेली में भड़की हिंसा

26 सितंबर को शहर में भड़की हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। आरोप है कि मौलाना तौकीर रजा ने कानपुर के ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद को मुद्दा बनाकर माहौल भड़काया। इसके बाद उपद्रवियों ने पुलिस पर एसिड, पेट्रोल बम और गोलियों से हमला किया। कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि शहर में भारी तोड़फोड़ हुई।

इस मामले में पांच थानों में 10 मुकदमे दर्ज हुए थे और 94 आरोपियों को जेल भेजा गया था।

असलहा नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन?

जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क की कमान इशरत अली के हाथ में थी, जो मौलाना के करीबी फरहत का भाई बताया जा रहा है। इशरत ही असलहों की सप्लाई का पूरा जाल संचालित कर रहा था।

19 फरवरी को पुलिस ने सोमू खान और तस्लीम को एक कार से भारी मात्रा में हथियारों के साथ पकड़ा था। पूछताछ में उन्होंने बताया कि झुमका तिराहे पर बाइक सवार दो लोगों को वीडियो कॉल के जरिए पहचान कन्फर्म करने के बाद हथियार सौंपे गए थे।

सीसीटीवी ने खोली पूरी पोल

पुलिस ने जब इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो साजिश का सच साफ हो गया। फुटेज में दिखा कि असलहों की खेप लेने वाले कोई और नहीं, बल्कि पार्षद अनीस सकलैनी और मुदस्सिर मिर्जा ही थे।

इसके बाद पुलिस ने दबिश देकर मुदस्सिर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने भी कबूल कर लिया कि दंगे के दौरान पुलिस पर जो फायरिंग हुई, उसमें यही हथियार इस्तेमाल हुए थे।

जांच जारी, और खुलासों के संकेत

पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा है और अभी कई और नाम सामने आ सकते हैं। इशरत अली पहले ही एक अन्य मामले में कोर्ट में सरेंडर कर चुका है। दंगे की साजिश से जुड़े हर किरदार को बेनकाब करने के लिए पुलिस लगातार जांच में जुटी है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta