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बरेली में ‘चैरिटी’ का खुला नया धंधा! ‘Being Alive’ हेल्थकेयर सेंटर का हुआ धमाकेदार शुभारंभ… लेकिन सवाल वही पुराने: पैसा कहाँ जाएगा?

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बरेली में ‘चैरिटी’ का खुला नया धंधा! ‘Being Alive’ हेल्थकेयर सेंटर का हुआ धमाकेदार शुभारंभ… लेकिन सवाल वही पुराने: पैसा कहाँ जाएगा?

बरेली। रविवार को शहर में एक और ‘मानवता की सेवा’ का नया नाटक मंचित हुआ। पाशुपतिनाथ मंदिर रोड पर Being Alive Charitable Healthcare Center का ऐसा भव्य उद्घाटन हुआ जैसे कोई फिल्म का क्लाइमेक्स सीन हो। लाइट्स, कैमरा, एक्शन… और बीच में गरीबों की सेवा का ढोंग!

मंच पर चमकते सितारे: मशहूर शायर वसीम बरेलवी साहब ने इसे “मानवता की सेवा” का सराहनीय कदम बताया। डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद अंसारी और शहर के कई ‘वरिष्ठ डॉक्टर’ भी बधाई देने पहुँच गए। लेकिन सवाल ये है – क्या ये सब सिर्फ़ फोटो खिंचवाने और सरकारी/दानदाताओं की नजर में अच्छा दिखने के लिए था?

Being Alive Foundation की अध्यक्ष डॉ. साबीन अहसन ने भावुक होकर कहा:  

“ये सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं, करुणा और सम्मान के साथ सेवा का संकल्प है। हम गरीबों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाएंगे।”

वाह! कितना सुंदर संकल्प… लेकिन बरेली में पिछले कुछ सालों में ऐसे कितने ‘संकल्प’ टूट चुके हैं? चैरिटी के नाम पर करोड़ों की ठगी, फर्जी एनजीओ, सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग – ये सब रोज़ की खबर बन चुके हैं। लोग दान देते हैं, सरकार सब्सिडी देती है, और बीच में कुछ लोग मजे लेते हैं – लग्जरी कारें, बंगले, विदेश यात्राएं!

अब ये नया सेंटर भी खुल गया। शानदार इमारत, आधुनिक मशीनें (कागजों पर), बड़े-बड़े डॉक्टरों की भीड़… लेकिन असली मरीजों को कब और कितना फायदा मिलेगा? या फिर ये सिर्फ़ दान इकट्ठा करने, सरकारी ग्रांट लेने और टैक्स छूट का नया जरिया है?

बरेली वासियों से गुजारिश:

– दान देने से पहले जांच लीजिए – रजिस्ट्रेशन है? ऑडिट रिपोर्ट कहाँ है?  

– फोटो सेशन और भाषणों पर मत बहकिए, असली सेवा देखिए।  

– क्योंकि चैरिटी का नाम लेकर ठगी का ये खेल अब बहुत पुराना हो चुका है… और अपना बरेली इसमें माहिर होता जा रहा है!

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta