झूठी FIR और कथित साजिश: पारिवारिक विवाद को तूल देकर खानदान-ए-आला हज़रत को बदनाम करने का आरोप
रिपोर्ट-सौरभ गुप्ता
बरेली। एसएसपी कार्यालय के बाहर गुरुवार को एक युवक द्वारा जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश किए जाने की घटना ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। अगले ही दिन शुक्रवार को घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया, जब युवक के पिता मुकद्दर एसएसपी कार्यालय पहुंचे और अपने ही बेटे व बहू पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रार्थनापत्र सौंपा।
इसी प्रकरण में युवक की बेटी की तहरीर पर थाना इज्जतनगर पुलिस ने मौलाना तौकीर रज़ा खां, मन्नान रज़ा खां उर्फ मन्नानी मियां के दामाद मोहसिन रज़ा खां सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
एफआईआर दर्ज होते ही मामला राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया। रविवार को मोहसिन रज़ा खां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि उनका इस पूरे विवाद से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब खुद युवक के पिता मुकद्दर ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि इस पूरे प्रकरण में मन्नानी मियां के दामाद मोहसिन रज़ा खां का कोई संबंध नहीं है। मुकद्दर ने साफ कहा कि यह उनका घरेलू और पारिवारिक विवाद है, जिसे बेवजह तूल देकर बाहरी लोगों को फंसाया जा रहा है।
इसके बावजूद आरोप है कि एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत खानदान-ए-आला हज़रत और मसलक-ए-आला हज़रत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
प्रेस बयान में कहा गया कि हर छोटे-बड़े विवाद को जबरन 26 सितंबर 2025 की एक घटना से जोड़ा जा रहा है और मौलाना तौकीर रज़ा खां का नाम घसीटकर पूरे खानदान को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। बयान के अनुसार, नवीर-ए-आला हज़रत के दामाद मोहसिन हसन खां को लगातार झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है और एक के बाद एक कथित फर्जी एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं।
न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का आरोप
मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि सिविल न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) द्वारा बुलडोजर कार्रवाई की कोशिश की गई, जिसे खुली न्यायालय अवमानना बताया गया। इतना ही नहीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 31 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में 1 दिसंबर 2025 को एक चौथाई धनराशि जमा किए जाने के बावजूद बिजली विभाग द्वारा रिकवरी की धमकियां दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
कथित गिरोह और अधिवक्ता पर सवाल
प्रेस बयान में शहर के एक कांग्रेसी अधिवक्ता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया कि वह एक ऐसे गिरोह का संचालन कर रहे हैं, जिसमें हिस्ट्रीशीटर अपराधी और कुछ महिलाएं शामिल हैं। यह गिरोह कथित रूप से झूठे मुकदमों के जरिए अवैध वसूली और लोगों को बदनाम करने का काम करता है। इस गिरोह का चेहरा बताए गए हिस्ट्रीशीटर नासिर सिद्दीकी (हिस्ट्रीशीट संख्या 442, थाना इज्जतनगर) पर दर्जनों मुकदमे दर्ज रहे हैं, जो बाद में पुलिस जांच या अदालत में खारिज हो चुके हैं।
जमीन विवाद और साजिश का दावा
आरोप है कि नासिर सिद्दीकी ने अपने सहयोगी शाकिर बेग के साथ मिलकर जमीन हड़पने की साजिश रची। बताया गया कि शाकिर बेग अपने पिता मुकद्दर बेग की जमीन पर कब्जा करना चाहता था। जमीन किसी अन्य को बिक जाने के बाद उसने एसएसपी कार्यालय में जहर खाने का नाटक किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकद्दर बेग ने अपने प्रार्थनापत्र में बेटे से जान का खतरा, बंधक बनाए जाने, पत्नी से मारपीट और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन इन पर अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
इसके विपरीत, आरोप है कि 5 दिसंबर 2025 की शाम शाकिर बेग की बेटी लाइवा के जरिए एक झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप लगाया गया कि मोहसिन हसन खां व अन्य लोग घर में घुसे और बदसलूकी व छेड़छाड़ की, जबकि दावा है कि उस समय मोहसिन हसन खां अपनी दुकान कटरा मानराय पर मौजूद थे, जिसका सीसीटीवी फुटेज और गवाह मौजूद हैं। बयान में यह भी कहा गया कि तौकीर रज़ा खां उस समय जेल में बंद थे, इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में जोड़ने की कोशिश की गई।
प्रेस बयान के अंत में दो टूक कहा गया कि यह पूरा मामला शाकिर बेग के परिवार का आंतरिक विवाद है। न जमीन खरीदी गई, न बेची गई और न ही खानदान-ए-आला हज़रत का इस परिवार या किसी जमीन से कोई संबंध है। इसे केवल बदनाम करने की साजिश बताया गया है।