
फाइक इंक्लेव में तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग का दावा, नगर निगम ने खोली फाइलें; चकरोड से नजूल तक पहले भी उठ चुके हैं सवाल
तालाब की जमीन पर ‘प्लॉटिंग का खेल’! रिकॉर्ड खंगाल रहा निगम, मौके की हकीकत से खुलेगा राज
फाइक इंक्लेव में सरकारी जमीनों पर फिर सवाल, तालाब की जमीन की होगी पैमाइश
कागजों में तालाब, जमीन पर निर्माण! शहर के 150 से ज्यादा तालाब निगम की रडार पर
तालाब बचेंगे या कब्जे रहेंगे कायम? मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नगर निगम ने कसी कमर
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। शहर में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं और इसी के साथ सरकारी जमीनों पर कब्जे के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। अब फाइक इंक्लेव में तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग किए जाने के दावे ने नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। मामला सामने आने के बाद निगम ने संबंधित अभिलेखों की पड़ताल शुरू कर दी है। राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कराया जाएगा, ताकि पता चल सके कि जिस जमीन को तालाब बताया जा रहा है, उसका वास्तविक रकबा कितना है और वर्तमान में वहां क्या स्थिति है।
फाइक इंक्लेव में जमीन से जुड़ा विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी इलाके में सरकारी चकरोड और तालाब की जमीन को लेकर जांच हो चुकी है। उस दौरान नजूल जमीन से जुड़े तथ्य सामने आने की बात कही गई थी। अब तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग के दावे ने पुराने मामलों की फाइलों को भी फिर से चर्चा में ला दिया है।
रिकॉर्ड बताएगा तालाब कितना था, अब कितना बचा….
नगर निगम अब अभिलेखों में दर्ज जमीन और मौके पर मौजूद जमीन का मिलान कराने की तैयारी में है। जांच में यह देखा जाएगा कि रिकॉर्ड में तालाब का कुल क्षेत्रफल कितना दर्ज है, उसकी सीमाएं क्या हैं और मौके पर कितनी जमीन वास्तव में तालाब के रूप में मौजूद है
इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं तालाब की भूमि पर निर्माण, प्लॉटिंग या किसी अन्य तरीके से कब्जा तो नहीं हुआ है। अगर रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय की जाएगी।
चकरोड से नजूल तक, पहले भी सामने आए थे जमीन के सवाल……
फाइक इंक्लेव इलाके में सरकारी जमीन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। चकरोड और तालाब की भूमि की जांच के दौरान नजूल जमीन से संबंधित स्थिति सामने आने की बात कही गई थी। अब तालाब की जमीन पर प्लॉटिंग के दावे के बाद निगम के पुराने रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
अधिकारियों की पड़ताल से ही स्पष्ट होगा कि जमीन की मौजूदा स्थिति क्या है और वहां किसी तरह का अतिक्रमण हुआ है या नहीं।
150 से ज्यादा तालाब रिकॉर्ड में, कई पर कब्जे का खतरा….
नगर निगम के रिकॉर्ड में शहर में 150 से अधिक तालाब दर्ज बताए जाते हैं। लेकिन बढ़ती आबादी और अनियोजित निर्माण के बीच कई तालाबों का क्षेत्रफल सिकुड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं तालाब की जमीन पर भवन खड़े होने के आरोप हैं तो कहीं स्कूल और अन्य निर्माण होने की बात सामने आई है।
हरूनगला में चार, जौहरपुर में छह और खलीलपुर में तीन तालाब दर्ज बताए गए हैं। कंजादासपुर में तालाब की जमीन से आंशिक कब्जा हटाने की कार्रवाई भी हो चुकी है। वहीं जगतपुर में भी तालाब की जमीन पर कब्जे का मामला सामने आया था।
अब तैयार होगा तालाबों का पूरा ‘कब्जा नक्शा’
नगर निगम शहर के तालाबों की स्थिति का विस्तृत ब्योरा जुटाने की कवायद में है। इसमें रिकॉर्ड में दर्ज तालाबों का रकबा, मौके पर उपलब्ध जमीन, अतिक्रमण की स्थिति और वर्तमान उपयोग जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।
पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी के मुताबिक तालाबों की जमीन पर कब्जे की वास्तविक स्थिति पता करने के लिए सूची तैयार की जा रही है। इसके बाद अतिक्रमण वाले स्थानों को चिह्नित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बढ़ी कार्रवाई की उम्मीद….
सरकारी जमीनों और तालाबों पर अतिक्रमण को लेकर शासन स्तर से सख्ती के निर्देशों के बाद नगर निगम भी सक्रिय दिखाई दे रहा है। अब फाइक इंक्लेव समेत शहर के दूसरे इलाकों में तालाबों की जमीन की स्थिति खंगाली जाएग
तालाब सिर्फ खाली पड़ी जमीन नहीं होते। इनका सीधा संबंध भूजल रिचार्ज, बारिश के पानी के संचयन और शहर की जल निकासी व्यवस्था से है। ऐसे में तालाबों का लगातार सिकुड़ना आने वाले समय में शहर के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
अब असली नजर इस बात पर होगी कि रिकॉर्ड की जांच और मौके की पैमाइश के बाद फाइक इंक्लेव में तालाब की जमीन को लेकर सामने आए दावे में कितनी सच्चाई निकलती है और अगर अतिक्रमण मिला तो नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या जमीन पर भी दिखाई देती है।