
US ईरान दो हफ्ते के सीजफायर की कहानी में अब नया ट्विस्ट: पाकिस्तान नहीं, चीन ने खेला ‘मास्टरस्ट्रोक’!
ट्रंप की धमकी से दहली दुनिया, पर्दे के पीछे चीन ने थामी जंग की लगाम
होर्मुज से महायुद्ध तक: कैसे आखिरी रात में बदला पूरा खेल, अंदर की पूरी कहानी
सीजफायर पर ‘चौधरी’ बना पाकिस्तान, लेकिन असली बाजीगर निकला कोई और
रिपोर्ट : नई दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली! अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ने वाले संभावित महायुद्ध ने पूरी दुनिया की सांसें रोक दी थीं। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी—“एक रात में ईरान को खत्म कर देंगे”—ने वैश्विक स्तर पर खलबली मचा दी। माना जा रहा था कि किसी भी वक्त ‘मदर ऑफ ऑल बम’ जैसे खतरनाक हथियार का इस्तेमाल हो सकता है।
लेकिन अचानक सुबह होते-होते तस्वीर बदल गई। युद्ध की आग शांत पड़ गई और दो हफ्तों के लिए सीजफायर का ऐलान हो गया। हैरानी की बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान खुद को ‘शांति दूत’ के तौर पर पेश करने लगा।
पाकिस्तान की कोशिशें बेअसर, फिर कैसे बनी बात?
पाकिस्तान कई हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर लगातार बातचीत में जुटे थे, लेकिन ईरान इन प्रयासों को खास तवज्जो नहीं दे रहा था।
अचानक जब सीजफायर की घोषणा हुई, तो पाकिस्तान की तारीफ जरूर हुई, लेकिन असली कहानी कुछ और ही निकली।
पर्दे के पीछे चीन की एंट्री, यहीं पलटा खेल
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में निर्णायक भूमिका चीन ने निभाई। जब पाकिस्तान के प्रयास विफल होते दिखे, तब चीन ने सीधे हस्तक्षेप किया और ईरान को समझौते के लिए राजी किया।
बताया जा रहा है कि चीन के दबाव और कूटनीतिक पहल के बाद ही ईरान ने युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार किया। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस समझौते को मंजूरी दी और इसे अपनी रणनीतिक जीत बताया।
चीन क्यों हुआ एक्टिव? वजह जानकर चौंक जाएंगे
इस ‘शांति मिशन’ के पीछे चीन का सीधा आर्थिक हित जुड़ा हुआ था।
चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर ईरान के तेल पर निर्भर है
होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ने से तेल सप्लाई बाधित हो रही थी
कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं
शिपिंग लागत बढ़ने से चीनी उद्योग पर दबाव बढ़ रहा था
अगर युद्ध लंबा खिंचता, तो चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता था। यही वजह रही कि उसने आखिरी वक्त में दखल देकर हालात संभाल लिए।
ट्रंप की धमकी बनी टर्निंग पॉइंट
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की सख्त चेतावनी—खासतौर पर होर्मुज रूट बंद होने पर ‘सभ्यता मिटाने’ की बात—ने दुनिया के कई देशों को सक्रिय कर दिया। अमेरिका के भीतर भी विपक्ष ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
यही वह क्षण था, जब वैश्विक कूटनीति अचानक तेज हो गई और चीन ने निर्णायक भूमिका निभाई।
सीजफायर की शर्तें भी दिलचस्प
दो हफ्तों के लिए युद्धविराम लागू
होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी
ईरान ने कहा—अगर हमले रुके, तो हम भी सैन्य कार्रवाई रोकेंगे
दिखा पाकिस्तान, चला चीन
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जो दिखता है, वह पूरा सच नहीं होता। मंच पर पाकिस्तान जरूर नजर आया, लेकिन असली स्क्रिप्ट चीन ने लिखी।
