
बरेली में धार्मिक मंच से फूटा सियासी बम—स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने किया तीखा वार, मोहन भागवत को दी शादी व संतान की सलाह, देशभर में छिड़ी नई बहस
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंच से ऐसा बयान दे डाला, जिसने धार्मिक ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया। हिंदू जनसंख्या बढ़ाने के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने सीधे संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा और कहा—“अगर हिंदुओं की संख्या बढ़ाना इतना ही जरूरी है, तो खुद उदाहरण पेश करिए… शादी करिए और बच्चे पैदा करिए!”
इस तीखे और चुभते बयान ने पलभर में सुर्खियां बटोर लीं। शंकराचार्य यहीं नहीं रुके—उन्होंने दो टूक कहा कि समाज को दिशा देने वाले नेताओं को पहले अपने जीवन में वही सिद्धांत अपनाने चाहिए, जो वे जनता को बताते हैं। उनके शब्दों में तंज भी था और सीधा संदेश भी।
उन्होंने सवाल उठाया—“क्या सिर्फ भाषणों से समाज बदल जाएगा? जो बात दूसरों से कह रहे हैं, उसे खुद पर लागू करने का साहस क्यों नहीं दिखाते?” इस बयान को कई लोग खुला राजनीतिक कटाक्ष मान रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक मर्यादा के नजरिए से देख रहे हैं।
बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल तेज हो गई। समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए हैं। जहां कुछ लोग शंकराचार्य के बयान को ‘सच बोलने की हिम्मत’ बता रहे हैं, वहीं अन्य इसे ‘अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला’ कह रहे हैं।
शंकराचार्य ने अंत में यह भी कहा कि धर्म और जनसंख्या जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले नेताओं को अपने आचरण पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि समाज में संतुलन और सद्भाव बना रहे।
फिलहाल, बरेली से उठा यह बयान अब राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है—और सियासत की गर्मी भी बढ़ा सकता है।