
सील अस्पताल में नया पंजीकरण! खुलासे के बाद सम्पादक को मिली जान से मारने की धमकी
बरेली में स्वास्थ्य विभाग पर सवाल: सील बिल्डिंग में अस्पताल, पत्रकार पर हमला
घोटाले का पर्दाफाश पड़ा भारी, सम्पादक पर हमले और धमकियों से दहशत
फर्जी डिग्री कांड से जुड़ा अस्पताल, फिर भी मिला नया लाइसेंस—उजागर करने वाले पर हमला
खबर छापना पड़ा महंगा! अस्पताल मालिक का हमला, सम्पादक ने मांगी सुरक्षा
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां फर्जीवाड़े के आरोपों में सील किए गए अस्पताल का रिकॉर्ड आज भी बंद दिखाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी भवन में नए नाम से अस्पताल का पंजीकरण कर दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण का खुलासा करने वाले सम्पादक कामरान अली अब खुद ही निशाने पर आ गए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को दिए पत्र में अपनी जान को खतरा बताया है।
सम्पादक का आरोप है कि वर्ष 2024 में फर्जी डिग्री के मामले में कार्रवाई के बाद जिस खुसरो हॉस्पिटल को सील किया गया था, वह आज भी विभागीय रिकॉर्ड में बंद है। इसके बावजूद वर्ष 2025 में उसी भवन में अन्नापूर्णा हॉस्पिटल का पंजीकरण कर दिया गया।
इस पूरे मामले में उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विश्राम सिंह और नोडल अधिकारी डॉ. अमित कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
मामले को लेकर पहले ही विवादों में रहे अस्पताल के संचालक शेर अली जाफरी का नाम भी फिर से चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ पहले फर्जी डिग्री का मुकदमा दर्ज हुआ था और उन्हें जेल भी भेजा गया था।
खबर छापने के बाद बवाल
सम्पादक का कहना है कि जैसे ही इस पूरे प्रकरण को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, अन्नापूर्णा हॉस्पिटल के संचालक सलमान खान भड़क उठे। आरोप है कि उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में ही सम्पादक को न केवल जान से मारने की धमकी दी, बल्कि सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश भी की।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वह हमलावर हो गए। मौके पर मौजूद एक अन्य पत्रकार ने बीच-बचाव कर किसी तरह मामला शांत कराया और सम्पादक की जान बचाई।
पहले भी हो चुके हैं हमले
सम्पादक ने बताया कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दो बार उन पर हमला किया जा चुका है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
सम्पादक ने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और खुद को सुरक्षा देने की अपील की है।
उन्होंने साफ कहा है कि यदि भविष्य में उनके या उनके परिवार व सहयोगी पत्रकारों के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नामजद लोगों की होगी।
फिलहाल, यह मामला स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और पत्रकारों की सुरक्षा—दोनों पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।