ईरान-इजरायल तनाव का असर: गर्मियों से पहले पानी पर महंगाई की मार

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तेल के बढ़ते दाम का असर: अब बोतलबंद पानी भी करेगा जेब ढीली!

ईरान-इजरायल तनाव का असर: गर्मियों से पहले पानी पर महंगाई की मार

प्लास्टिक (प्रिफॉम) हुआ महंगा, डक्क्न(कैप), रैपर भी हुआ महंगा! समझिए क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें

गर्मी से पहले झटका: बोतलबंद पानी के दाम बढ़ने के संकेत तेज

ईरान-इजरायल तनाव का असर: क्या गर्मियों से पहले महंगा होगा बोतलबंद पानी?

कच्चा तेल बना वजह: बरेली में अब पानी खरीदना पड़ेगा और महंगा!

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली! अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ने लगा है। खासकर ईरान और इजरायल के बीच जारी तनातनी ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है, जिसका सीधा असर भारत के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर उद्योग पर दिखाई देने लगा है। आने वाले समय में बोतलबंद पानी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका तेज हो गई है।

भारत का पैकेज्ड पानी बाजार करीब 40 हजार करोड़ रुपये का है और इसमें हजारों छोटे-बड़े निर्माता सक्रिय हैं। इस उद्योग की सबसे बड़ी लागत पैकेजिंग से जुड़ी होती है, जिसमें प्लास्टिक बोतल, ढक्कन, लेबल और कार्टन शामिल हैं। ये सभी चीजें पेट्रोलियम उत्पादों से तैयार होती हैं। ऐसे में जैसे ही कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, इनकी लागत भी तेजी से ऊपर चली जाती है।

छोटे निर्माताओं ने बढ़ाया दबाव

उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार, देशभर के करीब 2,000 छोटे निर्माताओं ने अपने स्तर पर कीमतों में इजाफा करना शुरू कर दिया है। डिस्ट्रीब्यूटर्स को दी जाने वाली बोतलों की कीमत में लगभग 1 रुपये प्रति बोतल तक की बढ़ोतरी की गई है, जो औसतन 5 फीसदी के आसपास है। यह संकेत है कि जल्द ही इसका असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है।

पैकेजिंग लागत में रिकॉर्ड उछाल

उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, प्लास्टिक बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। यह कीमत करीब 50 फीसदी बढ़कर 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। वहीं बोतलों के ढक्कन की कीमत भी दोगुनी होकर लगभग 0.45 रुपये प्रति पीस हो गई है। इसके अलावा कार्टन, लेबल, टेप और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे कंपनियों पर लागत का भारी दबाव है।

गर्मियों से पहले बढ़ी चिंता

यह स्थिति ऐसे समय पर सामने आई है जब देश में गर्मी का मौसम दस्तक देने वाला है। गर्मियों में बोतलबंद पानी की मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे में कंपनियों के सामने चुनौती है कि बढ़ती लागत को कैसे संभाला जाए और कीमतों को कितना नियंत्रित रखा जाए।

प्रीमियम सेगमेंट भी प्रभावित

केवल सामान्य पैकेज्ड पानी ही नहीं, बल्कि प्रीमियम मिनरल वॉटर सेगमेंट भी इस असर से अछूता नहीं है। इस श्रेणी में काम करने वाली कंपनियों ने भी अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कीमतों में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी शुरू कर दी है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में प्रीमियम पानी भी महंगा हो सकता है।

अभी कंपनियां खुद उठा रहीं बोझ

फिलहाल बड़ी कंपनियां उपभोक्ताओं पर सीधा असर न पड़े, इसके लिए बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन कर रही हैं। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों के लिए लंबे समय तक यह बोझ उठाना मुश्किल होगा। ऐसे में खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।

मांग क्यों बनी रहती है बरकरार?

कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद भारत में बोतलबंद पानी की मांग कम होने के आसार नहीं हैं। इसकी बड़ी वजह सुरक्षित पेयजल की कमी है। अनुमान है कि देश के लगभग 70 प्रतिशत भूजल स्रोत किसी न किसी स्तर पर दूषित हैं, जिसके चलते बड़ी आबादी को मजबूरी में बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।

कुल मिलाकर, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब आम उपभोक्ता तक पहुंचने की कगार पर है। फिलहाल कंपनियां कीमतों को थामने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो गर्मियों में बोतलबंद पानी की कीमतें बढ़ना लगभग तय है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

बड़ी MNC कम्पनियाँ….

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Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta