166वें वर्ष में प्रवेश करेगी बरेली की विश्व विख्यात रामलीला, 25 फरवरी से गूंजेगा जयघोष

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166वें वर्ष में प्रवेश करेगी बरेली की विश्व विख्यात रामलीला, 25 फरवरी से गूंजेगा जयघोष

नरसिंह मंदिर से निकलेगी पताका यात्रा, 15 मार्च को होगा श्रीराम राज्याभिषेक 

होली परंपरा की अनूठी मिसाल: 1861 से जारी है बरेली की ऐतिहासिक रामलीला

25 फरवरी से शुरू होगा विश्व प्रसिद्ध रामलीला महोत्सव, पताका यात्रा से होगा आगाज

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता 

बरेली। शहर की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक रामलीला इस वर्ष अपने 166वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। श्री रामलीला सभा, बरेली की ओर से बड़ी बमनपुरी स्थित नरसिंह मंदिर, बड़ी बमनपुरी में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया गया कि 25 फरवरी को गणेश पूजन और भव्य पताका यात्रा के साथ रामलीला महोत्सव का शुभारंभ होगा। 15 मार्च को श्रीराम राज्याभिषेक के साथ इसका समापन किया जाएगा।

सभा के उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा और महेश पंडित ने बताया कि होली के अवसर पर आयोजित होने वाली यह विशेष रामलीला देश में केवल बरेली में ही आयोजित होती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1861 में ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी और तब से यह परंपरा निरंतर जारी है। इस अवसर पर सभा द्वारा प्रकाशित स्मारिका का भी विमोचन किया गया।

शहर के विभिन्न स्थलों पर होंगे प्रमुख प्रसंग

रामलीला के मंचन का आयोजन शहर के अलग-अलग स्थानों पर प्रसंगानुसार किया जाएगा। अगस्त मुनि लीला, केवट संवाद, मेघनाथ यज्ञ और लंका दहन जैसे प्रमुख दृश्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। आयोजकों का कहना है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इन आयोजनों में शामिल होकर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं।

सभा के संरक्षक सर्वेश रस्तोगी ने बताया कि इस परंपरा को वैश्विक पहचान भी मिल चुकी है और इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलने से इसकी गरिमा और बढ़ी है।

अध्यक्ष राजू मिश्रा ने जानकारी दी कि 2 मार्च को राम बारात निकाली जाएगी। वहीं 3 मार्च को चंद्रग्रहण के चलते कार्यक्रम की तिथि में आंशिक बदलाव किया गया है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि इस सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और सफल आयोजन के लिए अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करें।

पत्रिका विमोचन के दौरान सभा के पदाधिकारी, पार्षदगण और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है और तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta