बरेली के सरदार नगर में जलता हुआ सपना… पुरानी रंजिश ने छीन ली मेहनत की कमाई
रिपोर्ट/सौरभ गुप्ता
बरेली। शाम का धुंधलका छा रहा था कि सरदार नगर के ब्रह्मदेव स्थान के पास एक छोटा-सा मोटरसाइकिल रिपेयरिंग और वाशिंग का खोखा आग की लपटों में सुलग उठा। जहां कभी इंजन की आवाज़ और ग्राहकों की हंसी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ़ जलती लकड़ियों की चटख और राख की बदबू बाकी रह गई।
दुकान मालिक मोहम्मद हसन पुत्र आजाद हुसैन की आंखों में आंसू और सीने में जलन… वो सालों से इसी छोटे-से खोखे में पसीना बहाकर परिवार का पेट पाल रहे थे। रोज़ की कमाई से, घर का खर्च और थोड़ी-बहुत बचत सब कुछ इसी खोखे से जुड़ा था। लेकिन शनिवार शाम 17 जनवरी 2026 को सब कुछ राख हो गया।
हसन बताते हैं, “भाई… ये आग नहीं, मेरी मेहनत पर लगाई गई साजिश है।” उनकी आवाज़ में गुस्सा भी है और दर्द भी। पड़ोसी वेल्डिंग और पंचर रिपेयरिंग के मालिक सुशील और गौरव दोनों भाइयों से पुरानी रंजिश चल रही थी। हसन के मुताबिक, कुछ दिन पहले दोनों भाइयों ने बिना वजह झगड़ा किया और खुलेआम धमकी दी”तेरा खोखा यहां नहीं चलने देंगे… नहीं हटाया तो आग लगा देंगे!”
शाम को दुकान बंद कर घर लौटे हसन को करीब 7 बजे फोन आया—”भैया, आपका खोखा जल रहा है!”गांव के जयप्रकाश चौहान ने खबर दी। हड़बड़ाकर पहुंचे तो देखा—पूरी दुकान आग की गोद में समा चुकी थी। टूल्स, स्पेयर पार्ट्स, ग्राहकों की बाइकें—सब कुछ जलकर खाक। स्थानीय लोगों ने मेहनत से आग पर काबू पाया, वरना ये आग और भी भयानक रूप ले सकती थी।
हसन की आंखें नम हो जाती हैं जब वो कहते हैं.
“मैंने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा। बस मेहनत-मजदूरी से परिवार चलाना चाहता था। अब सब खत्म… ? घर का खर्च कैसे चलेगा? ये सिर्फ दुकान नहीं जली, मेरी पूरी जिंदगी की उम्मीदें जल गईं।”
घटना के बाद हसन ने थाना भमोरा में तहरीर देकर सुशीलऔर गौरव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मौके का मुआयना किया और जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
स्थानीय लोग भी सदमे में हैं। एक बुजुर्ग कहते हैं, “छोटे-छोटे धंधों में रंजिश तो होती रहती है, लेकिन किसी की मेहनत को आग से जलाना… ये इंसानियत के खिलाफ है।”
जन माध्यम की अपील—पुलिस इस मामले की गहन जांच करे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि ऐसे दिल दहला देने वाले हादसे दोबारा न हों। एक गरीब मजदूर का छोटा-सा खोखा जलना सिर्फ ईंट-पत्थर का नुकसान नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों का अंत है।
क्या न्याय मिलेगा मोहम्मद हसन को? क्या उनकी जली हुई उम्मीदें फिर से जलेंगी? समय बताएगा… लेकिन फिलहाल सरदार नगर में सन्नाटा है, और हवा में राख की कड़वाहट बरकरार है।