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बरेली की गोशाला में गौवंश का कत्ल! चारा डकार गए जिम्मेदार, भूख-ठंड से तड़पकर मरीं दर्जनों गायें

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बरेली की गोशाला में गौवंश का कत्ल! चारा डकार गए जिम्मेदार, भूख-ठंड से तड़पकर मरीं दर्जनों गायें

‘हे कान्हा माफ करना…’ बरेली में गोमाता असहाय, लापरवाही और भ्रष्टाचार ने ली 24 से ज्यादा जानें

गोशाला नहीं बना ‘मौत का घर’! बरेली में चारा घोटाले की कीमत गोवंश ने जान देकर चुकाई

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। हे कान्हा, क्षमा करना… तुम्हारी ही धरती पर तुम्हारी गोमाता आज असहाय है। कहीं भूख और ठंड से तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही हैं तो कहीं लापरवाही और लालच की बलि चढ़ रही हैं। बरेली जिले की एक गोशाला से सामने आई तस्वीरें और तथ्य इंसानियत को शर्मसार करने वाले हैं।

आंवला तहसील क्षेत्र के अनुरुद्धपुर गांव स्थित गोशाला में अव्यवस्था और गंभीर लापरवाही के कारण दो दर्जन से अधिक गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई। जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए—गोशाला में न तो पर्याप्त चारा था, न भूसा और न ही चोकर। साफ-सफाई की हालत बदतर थी और कई पशु बीमार अवस्था में पड़े मिले।

स्थानीय लोगों और हिन्दू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया। एडीएम पूर्णिमा सिंह और एसडीएम विदुषी सिंह ने गोशाला का औचक निरीक्षण किया, जहां व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। निरीक्षण में चारे की भारी कमी, गंदगी और देखरेख में घोर लापरवाही की पुष्टि हुई।

मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने ग्राम सचिव और पशु चिकित्सक को निलंबित, केयरटेकर को हटाने के साथ-साथ ग्राम प्रधान और अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मृत गोवंशों का निस्तारण कराया गया, जबकि जीवित लेकिन बीमार पशुओं के इलाज और ठंड से बचाव के लिए तत्काल इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि गोवंश के लिए भेजा गया चारा और भूसा आखिर गया कहां? प्रशासनिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि जिम्मेदारों ने ही पशुओं के हिस्से का चारा हजम कर लिया, जिसकी कीमत बेजुबान जानवरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

एसडीएम विदुषी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोशाला प्रबंधन की यह लापरवाही अक्षम्य अपराध है। जिन लोगों को गोवंश की देखभाल सौंपी गई थी, उन्होंने अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ा। सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और अभिलेख जब्त कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

इस दर्दनाक घटना ने जिले की सभी गोशालाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने अब जिलेभर की गोशालाओं में नियमित जांच और व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि भविष्य में गोमाता को इस तरह की पीड़ा न सहनी पड़े।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta