
केरल में बर्ड फ्लू की दस्तक, स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट
क्या हैं बर्ड फ्लू के लक्षण? जानिए समय रहते पहचान
बचाव के उपाय और जरूरी सावधानियां, इन्हें न करें नजरअंदाज
रिपोर्ट : ब्यूरो, नई दिल्ली!
नई दिल्ली! केरल के अलाप्पुझा और कोट्टायम जिलों में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। यह वायरस आमतौर पर पक्षियों को संक्रमित करता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इंसानों तक भी पहुंच सकता है। इसी वजह से प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

बर्ड फ्लू मुख्य रूप से मुर्गी, बत्तख, टर्की जैसी पोल्ट्री के साथ-साथ जंगली और प्रवासी पक्षियों के जरिए फैलता है। संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने से मनुष्यों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि इंसान से इंसान में इसका फैलना बहुत ही दुर्लभ माना जाता है।
बर्ड फ्लू के प्रमुख लक्षण :
बर्ड फ्लू के लक्षण आम फ्लू से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, थकान, आंखों में जलन या संक्रमण, नाक बहना, उल्टी-दस्त और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

बर्ड फ्लू क्यों होता है?
यह बीमारी इन्फ्लुएंजा-ए वायरस के कारण होती है, जिसमें H5N1 स्ट्रेन सबसे अधिक चर्चा में रहता है। यह वायरस श्वसन तंत्र और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में शरीर के अन्य अंगों तक भी पहुंच सकता है।
बचाव के लिए क्या करें और क्या नहीं :
बर्ड फ्लू से बचने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, कच्चे मांस और अंडों को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं, बीमार या मृत पक्षियों के संपर्क से बचें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षात्मक दस्ताने व मास्क का उपयोग करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयां न लें और लक्षण दिखने पर खुद को आइसोलेट कर जांच कराएं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता और सही जानकारी ही बर्ड फ्लू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।