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बरेली मे अब झुमका तिराहा बनेगा यातायात का नया केंद्र, 20 एकड़ में बनेगा मेगा बस टर्मिनल

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बरेली मे अब झुमका तिराहा बनेगा यातायात का नया केंद्र, 20 एकड़ में बनेगा मेगा बस टर्मिनल

बरेली को जाम से मिलेगी राहत, शहर से बाहर शिफ्ट होंगे बस अड्डे

पीपीपी मॉडल पर बदलेगी रोडवेज की तस्वीर, मार्च 2026 से शुरू हो सकता है निर्माण

रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता

बरेली। शहर की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव और रोजाना लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए परिवहन निगम और जिला प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। अब रोडवेज बसों का संचालन शहर के भीतर स्थित बस अड्डों से हटाकर शहर के बाहरी हिस्सों में विकसित किए जाने वाले आधुनिक बस टर्मिनलों से किया जाएगा।

इस योजना के तहत बरेली को एक मेगा बस टर्मिनल और एक अत्याधुनिक इंटर स्टेट बस अड्डे की सौगात मिलने जा रही है। घनी आबादी के बीच स्थित पुराना रोडवेज बस अड्डा लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ था। वीआईपी मूवमेंट या बड़े आयोजनों के दौरान बस अड्डे का संचालन बाधित करना पड़ता है, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। वहीं बसों की आवाजाही के कारण आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित रहती है।

मौजूदा सैटेलाइट बस अड्डे की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यात्री सुविधाओं की कमी, अव्यवस्थित पार्किंग और बढ़ते ट्रैफिक दबाव के चलते यहां आने-जाने वाले लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन सभी समस्याओं को देखते हुए प्रशासन ने शहर के बाहर नए बस टर्मिनलों के विकास की योजना को गति दी है।

इसी क्रम में दिल्ली और रामपुर रूट की बसों के संचालन के लिए झुमका तिराहा क्षेत्र में लगभग 20 एकड़ भूमि पर एक अत्याधुनिक मेगा बस टर्मिनल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्तावित टर्मिनल में यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं, सुव्यवस्थित बस बे, पर्याप्त पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि शहर के भीतर यातायात दबाव भी काफी हद तक कम होगा।

वहीं, सैटेलाइट बस अड्डे को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर इंटर स्टेट बस टर्मिनल के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना में बस अड्डे के पीछे स्थित रोडवेज वर्कशॉप की भूमि को भी शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का निर्माण कार्य मार्च 2026 से शुरू होने की संभावना है।

रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने बताया कि नई कार्ययोजना के तहत अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के निर्माण में एनओसी जैसी जटिल औपचारिकताओं की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे परियोजना को तेजी मिलेगी। वर्तमान में सैटेलाइट बस अड्डे से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़ और उत्तराखंड समेत कई राज्यों के लिए बसों का संचालन होता है। पीपीपी मॉडल पर विकास होने से यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और बरेली की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुचारू हो सकेगी।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta