
कड़ाके की ठंड में भी उमड़ा आस्था का सागर, बरेली में श्रद्धा-उत्साह के साथ मना गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व
रिपोर्ट :- सौरभ गुप्ता
बरेली। सिख धर्म के दसवें गुरु साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी का पावन प्रकाश पर्व शनिवार को बरेली कॉलेज के हॉकी ग्राउंड में भव्य, अनुशासित और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। सुबह से ही संगत का पहुंचना शुरू हो गया और देर शाम तक पूरा मैदान गुरु भक्ति के रंग में सराबोर रहा।
कार्यक्रम में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित शामिल हुए। देश-विदेश से पधारे विश्व प्रसिद्ध रागी जत्थों ने गुरबाणी कीर्तन से संगत को निहाल कर दिया। कीर्तन के दौरान पूरा पंडाल “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।
रागी जत्थों और धर्म प्रचारकों ने गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन, उनके अद्वितीय त्याग, वीरता और खालसा पंथ की स्थापना के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि गुरु महाराज का जीवन सत्य, साहस और मानवता की सेवा का प्रतीक है, जिसे अपनाकर ही समाज को सही दिशा दी जा सकती है।
समारोह में कई राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक हस्तियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के साथ-साथ गुरु का अटूट लंगर भी आयोजित किया गया, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रेम और समानता के भाव के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
समापन अवसर पर आयोजकों ने समस्त संगत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, बलिदान देने और मानवता की निस्वार्थ सेवा का संदेश देता है। यही गुरु महाराज के प्रति सच्ची श्रद्धा और सम्मान है।