
‘बाबर’ नाम से किसी भी निर्माण का विरोध, राष्ट्रीय हनुमान दल ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। राष्ट्रीय हनुमान दल ने रविवार को भारत में “बाबर” नाम से किसी भी प्रकार के निर्माण या स्थल के नामकरण के खिलाफ आवाज बुलंद की। संगठन के जिला अध्यक्ष राज शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
इस अवसर पर राज शर्मा ने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टि से बाबर भारत का मूल निवासी नहीं था, बल्कि उसने 1526 में आक्रमण के जरिए सत्ता हासिल की थी। संगठन का मानना है कि ऐसे ऐतिहासिक आक्रांताओं से जुड़े नामों का महिमामंडन देश की सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है।
ज्ञापन में मुगल काल के दौरान हुए कथित धार्मिक दमन, जजिया कर, मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाए जाने जैसे ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं से आज भी समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय हनुमान दल ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित “बाबर” नाम से जुड़े निर्माण पर आपत्ति जताई। संगठन का तर्क है कि इस तरह के नामों का उपयोग सामाजिक तनाव और अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकता है।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि भारत में किसी भी ऐतिहासिक आक्रांता के नाम पर निर्माण या नामकरण पर रोक लगाई जाए, ऐसे मामलों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं तथा पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित निर्माण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यह पहल किसी भी समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सामाजिक शांति और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के उद्देश्य से की गई है। राष्ट्रीय हनुमान दल ने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संवैधानिक दायरे में उचित कार्रवाई करेंगे।