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अवैध मस्जिदों के खिलाफ आवाज उठाना उलमा को पड़ा भारी! फतवे और सामाजिक बहिष्कार का आरोप, सुरक्षा की गुहार

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अवैध मस्जिदों के खिलाफ आवाज उठाना उलमा को पड़ा भारी! फतवे और सामाजिक बहिष्कार का आरोप, सुरक्षा की गुहार

बरेली। जनपद बरेली में कानून और शरीयत के तहत अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक उलमा को अब उसी की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। मीरगंज थाना क्षेत्र के शेखुपुरा निवासी उलमा मोहम्मद आरिफ कुरैशी ने अवैध भूमि पर बनी मस्जिदों में नमाज को अनुचित बताते हुए शासन से शिकायत की थी, जिसके बाद वह विवादों के केंद्र में आ गए हैं।

उलमा आरिफ कुरैशी का आरोप है कि उनकी बात से नाराज़ होकर समुदाय के कुछ लोगों ने उनके खिलाफ फतवा जारी करा दिया और उन्हें समाज से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया। हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार किए जाने के साथ-साथ उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलने की बात कही जा रही है।

पीड़ित उलमा का कहना है कि उन्होंने कोई भड़काऊ बयान नहीं दिया, बल्कि कानून और इस्लामी नियमों के अनुरूप ही अपनी बात रखी। उनका सवाल है कि यदि अवैध जमीन पर अवैध निर्माण का विरोध करना अपराध है, तो फिर कानून का मतलब ही क्या रह जाता है?

उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार मिल रही धमकियों के चलते उनका पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है। उलमा आरिफ कुरैशी ने प्रशासन से सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चाओं और बहसों का दौर तेज हो गया है। फिलहाल पीड़ित उलमा को प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार है और देखना होगा कि शासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta