
अवैध अस्पतालों का गढ़ बना सिरौली: एस.के. नर्सिंग होम की लापरवाही से उजड़ी गोद, स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत पर उठे गंभीर सवाल
रिपोर्ट : विवेक गुप्ता
सिरौली। स्वास्थ्य विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली और अवैध नर्सिंग होम संचालकों की सरपरस्ती ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सिरौली कस्बे में नियमों को ताक पर रखकर संचालित एस.के. (S.K.) नर्सिंग होम में डॉक्टरों की अंधी हवस और घोर लापरवाही के चलते 9 महीने के नवजात की कोख में ही दर्दनाक मौत हो गई। हद तो तब पार हो गई जब पीड़ित गरीब पिता से ऑपरेशन के नाम पर 80 हजार रुपये ऐंठ लिए गए, लेकिन बदले में न तो कोई वैध रसीद दी गई और न ही अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट। विरोध करने पर अस्पताल के गुर्गों ने झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी।
ग्राम ब्योधन बुजुर्ग निवासी जितेंद्र की पत्नी प्रीति को 13 अगस्त को प्रसव पीड़ा होने पर इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में नॉर्मल डिलीवरी का झांसा देने वाले अस्पताल प्रबंधन ने 14 अगस्त को ऑपरेशन का ढोल पीटकर मनमाना पैसा वसूल लिया। जिस नर्सिंग होम का पंजीकरण किसी अन्य महिला के नाम पर है। वहां एक बाहरी और अप्रशिक्षित पुरुष डॉक्टर ने बिना मानकों के चीरफाड़ कर डाली। 18 घंटे के भीतर तीन अल्ट्रासाउंड कराने के नाम पर खुलेआम लूटपाट की गई।
जब पीड़ित ने 18 अगस्त को इस धोखाधड़ी का विरोध किया। तो अस्पताल के कारिंदों ने धौंस जमाते हुए कहा। हमारी ऊपर तक पहुंच है। ज्यादा बोलोगे तो छेड़छाड़ के झूठे मुकदमे में जेल भिजवा देंगे।
आखिरकार ऐसे ‘कसाई खानों’ पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जेबें गर्म होने के कारण ही ये मौत के सौदेड़े बेखौफ घूम रहे हैं? आए दिन हो रही ऐसी घटनाओं के बाद भी सीएमओ कार्यालय और स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन की खामोशी गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करती है। पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से इस अवैध अस्पताल की उच्च स्तरीय जांच कराकर संचालक और फर्जी डॉक्टरों पर सख्त रासुका के तहत कार्रवाई की मांग की है।
क्या जिला प्रशासन इस मौत के कुएं पर ताला जड़ेगा, या फिर किसी और गरीब की गोद उजड़ने का इंतजार किया जाएगा।