
राहुल सिंह राणा, शहडोल। एक दौर था जब 52 पत्तों का खेल यानी “ताश” सिर्फ मनोरंजन या त्योहारों के समय का शगुन हुआ करता था, लेकिन अब वक्त बदल चुका है। ताश का ये पारंपरिक खेल हाईटेक हो गया है। जुआ अब सिर्फ फड़ संचालक का होता है. फड़ संचालक के साथ एक फाइनेंसर (बुकीज) भी रहता है. जिसे बुक काटने वाला कहा जाता है. अधिकांश जुआ फड़ो में जीत सिर्फ बुक काटने वालो कि ही है. क्योंकि खिलाड़ियों के लिए नियम अलग और बुक काटने वाले के लिए नियम अलग रहते हैं. ताश काटने वाला खिलाड़ी यानी बाहर के तरफ लोकल भाषा में छुट्टा ताश का पत्ता बाहर आ जाए तो… जितनी रकम ताश फेंकने वाले ने मानी है. वह दिया जाएगा और जो बाकी कि रकम बुक काटने वाले ने जीती है. तो वह नहीं दिया जाएगा. और वहीं इसके विपरीत ताश का पत्ता अगर छुट्टा अंदर आ जाए तो… ताश फेंकने वाले से बाकी बची रकम जीतने वाला बुकीज (खाई-बाज) अपने पास रख लेता हैं। वही बुक काटने वालों से लेकर ताश फेंकने वाले को कट्टी टैक्स देना पड़ता है. उसमें भी बुक काटने वाले का लाभ अलग से रहता है. 10% प्रतिशत फेंकने वाले खिलाड़ियों और 5% प्रतिशत ‘कट्टी टैक्स’ लेने वाले बुक काटने वाले को लगता हैं
अब खेल में कटबाज कि जगह मार्क्ड कार्ड्स कि टेक्नोलॉजी
मुखबिर से मिली जानकारी के मुताबिक, अब संभाग के जगहों पर जुए के फड़ मार्क्ड कार्ड्स (Marked Cards) जो अदृश्य होते हैं जो आमतौर पर नॉर्मल ताश के पत्ते जैसे दिखते हैं. जो अदृश्य स्याही या बारकोड के साथ आते हैं. जिन्हें विशेष स्कैनर या कैमरे से देखा जाता है, और ब्लूटूथ के माध्यम से डेटा भेज दिया जाता हैं। आमतौर पर एक छुपे हुए कैमरे या स्कैनर जैसे मोबाइल फोन, घड़ी, या विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए कार्ड शूज़ में लगे हुए के साथ काम करते हैं, जो कार्डों पर बने अदृश्य निशानों या बारकोड को स्कैन करता है। फिर यह जानकारी ब्लूटूथ के माध्यम से एक छोटे, अदृश्य ईयर पॉट्स या किसी अन्य रिसीवर को भेजी जाती है, जिससे खिलाडी को पत्तों की जानकारी मिल जाती है। और फिर वह अपने हिसाब से धोखाधड़ी कर देते हैं. अन्य खिलाड़ियों के साथ. अब संभाग के अधिकांश जगहों पर ब्लूटूथ डिवाइस और स्कैनर वाले ताश के पत्ते ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
जीत सिर्फ फड़ संचालक और बुक काटने वाले कि
मुखबिर कि माने तो इस तरह के हाईटेक जुए से खिलाड़ियों को भारी नुकसान होता हैं. तो फड़ संचालको और बुक काटने वालो को करोड़ों मुनाफा हो रहा है, 10% फेंकने वालों को लगता हैं कट्टी टेक्स अब खेल सिर्फ किस्मत नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी की चालों पर निर्भर हो गया है। गौरतलब है कि कई जगहों पर पुलिस ने ब्लूटूथ स्कैनर, स्मार्ट चश्मे और डिजिटल ताश के पैक बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि इन उपकरणों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदा जाता है. और इन्हें पहचानना आम आदमी के लिए लगभग नामुमकिन है। अब ताश का खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि हाईटेक जुए की नई चाल बन गया है। जहां पहले पत्तों के इशारे से खिलाड़ी धोखा खाते थे, वहीं अब ब्लूटूथ की बीप और स्कैनर की लाइट तय कर रही है कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा।
The mukhbir कि रिपोर्ट…