
कोर्ट में बदले बयान, दुष्कर्म के आरोपी डॉक्टर को मिली बड़ी राहत
गवाहों के पलटने पर पॉक्सो कोर्ट ने सभी आरोपों से किया बरी
रिपोर्ट : सौरभ गुप्ता
बरेली। दुष्कर्म के एक चर्चित मामले में अदालत ने आरोपी डॉक्टर को बड़ी राहत देते हुए दोषमुक्त करार दिया है। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट की अदालत ने यह फैसला तब सुनाया, जब पीड़िता और उसके परिजन सुनवाई के दौरान अपने पूर्व बयानों से मुकर गए।
मामला इज्जतनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा था। आरोप था कि बहेड़ी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी डॉक्टर, जो इज्जतनगर इलाके में क्लीनिक संचालित करता था, ने सितंबर 2023 में 17 वर्षीय किशोरी को इलाज के बहाने बुलाकर दुष्कर्म किया। पीड़िता के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।
पुलिस जांच के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। 28 मार्च 2024 को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर नियमित सुनवाई शुरू की।
‘बहकावे में आकर लिखाई थी रिपोर्ट’
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को उस समय गहरा झटका लगा, जब पीड़िता, उसकी मां और पिता तीनों ने अपने पहले दिए गए बयानों को गलत बताया। पीड़िता के पिता ने अदालत में कहा कि घटना के समय उनकी बेटी बालिग थी और डॉक्टर ने उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं की।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों के कहने पर उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी। वर्तमान में उनकी बेटी की शादी उसी डॉक्टर से हो चुकी है और दोनों पति-पत्नी के रूप में सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पीड़िता और उसकी मां ने भी किसी प्रकार के दुष्कर्म या दबाव से साफ इनकार किया।
सबूत नहीं, तो सजा नहीं
अदालत ने सभी गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और पूरे मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है। सबूतों के अभाव में स्पेशल जज देवाशीष की अदालत ने आरोपी डॉक्टर को सभी धाराओं से बरी कर दिया।