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सांसें चलती रहीं, डॉक्टरों ने लिख दिया ‘मौत’ — हैलेट अस्पताल में इंसानियत हुई शर्मसार

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सांसें चलती रहीं, डॉक्टरों ने लिख दिया ‘मौत’ — हैलेट अस्पताल में इंसानियत हुई शर्मसार

जिंदा मरीज को शव समझ भेज दी पोस्टमार्टम की सूचना, पुलिस पहुंची तो खुला खौफनाक सच

हैलेट अस्पताल की बड़ी चूक: न नब्ज देखी, न सांस… जिंदा इंसान बना दिया लाश

सांसें चल रही थीं, लेकिन कागजों में हो चुकी थी मौत

रिपोर्ट : कानपुर ब्यूरो

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित लाला लाजपत राय अस्पताल (हैलेट हॉस्पिटल) से स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां जूनियर डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही के चलते एक जिंदा मरीज को मृत घोषित कर दिया गया और पुलिस को पोस्टमार्टम की सूचना तक भेज दी गई। गनीमत रही कि वक्त रहते सच्चाई सामने आ गई, वरना एक जिंदा इंसान की जिंदगी हमेशा के लिए खत्म हो सकती थी।

पुलिस पहुंची तो बेड पर चल रही थीं सांसे

यह मामला हैलेट अस्पताल के वार्ड नंबर-12 का है। मरीज की हालत नाजुक बताकर जूनियर डॉक्टरों ने बिना समुचित मेडिकल जांच के उसे मृत घोषित कर दिया। न नब्ज जांची गई, न सांसों की पुष्टि की गई और न ही किसी वरिष्ठ चिकित्सक से अंतिम सत्यापन कराया गया।

जब नगर थाना पुलिस शव को कब्जे में लेने इमरजेंसी पहुंची, तो वहां का दृश्य देख हर कोई सन्न रह गया। मरीज बेड पर लेटा हुआ था और उसकी छाती साफ तौर पर ऊपर-नीचे हो रही थी। वह जीवित था।

अज्ञात हालत में भर्ती था मरीज

जानकारी के मुताबिक मरीज को गोविंद नगर पुलिस द्वारा अज्ञात हालत में इलाज के लिए हैलेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसका इलाज सीनियर डॉक्टर ब्रजेश कुमार की निगरानी में चल रहा था। हालत गंभीर जरूर थी, लेकिन मृत घोषित कर देना सीधे-सीधे मेडिकल लापरवाही का मामला बन गया।

वार्ड में मचा हड़कंप, परिजनों में आक्रोश

घटना की खबर फैलते ही वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के तीमारदारों ने प्रशासन पर जमकर नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही लापरवाही आम बात है, लेकिन जिंदा मरीज को मृत बताना डराने वाला और अमानवीय है।

अस्पताल प्रशासन ने मानी भारी चूक

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के एसआईसी डॉ. आर.के. सिंह और मेडिकल कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ. ऋचा गिरी मौके पर पहुंचे और पूरे वार्ड का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह बेहद गंभीर लापरवाही है, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

48 घंटे में जांच रिपोर्ट, कार्रवाई तय

अस्पताल प्रशासन ने तत्काल जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच में जो भी डॉक्टर या स्टाफ दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

मरीज की हालत स्थिर, निगरानी में इलाज

फिलहाल राहत की बात यह है कि मरीज की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। उसे विशेष निगरानी में रखा गया है और लगातार चिकित्सकीय देखरेख जारी है। वहीं पुलिस ने भी इस पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।

यह घटना न केवल हैलेट अस्पताल बल्कि पूरी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिंदा इंसान को कागजों में मृत घोषित कर देना ऐसी चूक है, जिसकी कीमत किसी की जान भी हो सकती थी। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

Saurabh Gupta
Author: Saurabh Gupta