
राम मंदिर ट्रस्ट सर्वोच्च न्यायालय से ऐतिहासिक सबूत और दस्तावेज़ मांगेगा वापस
इन्हीं सबूतों के आधार मानकर सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर के पक्ष में दिया था ऐतिहासिक फैसला
अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक साक्ष्य और दस्तावेज़ वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। ये वही महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जिनके आधार पर देश की सर्वोच्च अदालत ने राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। अब जबकि इस निर्णय को लेकर किसी भी स्तर पर कोई कानूनी चुनौती शेष नहीं रह गई है, ट्रस्ट ने इन साक्ष्यों को अयोध्या में ही संरक्षित करने का निर्णय लिया है।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा की गई खुदाई के दौरान जो भी ऐतिहासिक अवशेष, संरचनात्मक प्रमाण और दस्तावेज़ प्राप्त हुए थे, वे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की अभिरक्षा में सुरक्षित रखे गए हैं। राम मंदिर ट्रस्ट जल्द ही सुप्रीम कोर्ट को एक औपचारिक पत्र लिखकर इन साक्ष्यों को सौंपने का अनुरोध करेगा। ट्रस्ट का मानना है कि इन प्रमाणों को राम मंदिर परिसर में प्रस्तावित संग्रहालय में रखा जाना चाहिए, ताकि आम जनमानस भी देश के इस ऐतिहासिक फैसले की पृष्ठभूमि को समझ सके।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस विषय में स्पष्ट रूप से कहा है कि अब न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और फैसले को चुनौती देने वाला कोई पक्ष शेष नहीं है। ऐसे में ऐतिहासिक साक्ष्यों को अदालत में रोके रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि इन प्रमाणों को पूरी गरिमा, वैज्ञानिक पद्धति और सुरक्षा के साथ संरक्षित किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सच से परिचित हो सकें।
राम मंदिर परिसर में एक भव्य और आधुनिक संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें रामायण काल से लेकर मध्यकालीन इतिहास तक के महत्वपूर्ण प्रसंगों को दर्शाया जाएगा। इस संग्रहालय में विशेष गैलरियां बनाई जाएंगी, जिनमें खुदाई से प्राप्त स्तंभ, शिलालेख, मूर्तिकला के अवशेष, स्थापत्य से जुड़े प्रमाण और अन्य ऐतिहासिक सामग्री को प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रस्ट का उद्देश्य केवल वस्तुओं को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ को भी आम लोगों तक सरल भाषा और आधुनिक तकनीक के माध्यम से पहुंचाना है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) चेन्नई के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने जा रहा है। आईआईटी चेन्नई की टीम गैलरियों के डिजाइन, प्रस्तुति और तकनीकी नवाचारों में सहयोग करेगी। आधुनिक लाइटिंग, डिजिटल डिस्प्ले, थ्री-डी प्रोजेक्शन और ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए रामायण काल के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
संग्रहालय में भगवान हनुमान से जुड़ी एक विशेष गैलरी भी प्रस्तावित है, जहां उनकी मूर्ति को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस गैलरी में हनुमान जी के जीवन, उनके पराक्रम और रामभक्ति को डिजिटल और इंटरएक्टिव स्वरूप में दिखाया जाएगा, जिससे युवा पीढ़ी भी सहज रूप से इससे जुड़ सके।
राम मंदिर ट्रस्ट का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक इन सभी गैलरियों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। इसके बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक न केवल रामलला के दर्शन कर सकेंगे, बल्कि भारत के प्राचीन इतिहास और रामायण परंपरा की गहराई से जानकारी भी प्राप्त कर पाएंगे।
इसके साथ ही मंदिर परिसर में देश और दुनिया की विभिन्न प्राचीन रामायणों का संग्रह भी किया जाएगा। अलग-अलग भाषाओं और देशों में रचित रामायणों की प्रतियों को एक ही स्थान पर संरक्षित करने की योजना है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भगवान राम की कथा केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा बनी।
एक महत्वपूर्ण पहल के तहत बाल्मीकि रामायण की प्राचीन प्रति को गर्भगृह में स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने वाराणसी स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय से संपर्क किया है। यदि यह योजना साकार होती है, तो यह राम मंदिर को आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि शास्त्रीय और ऐतिहासिक दृष्टि से भी और अधिक महत्वपूर्ण बना देगी।
कुल मिलाकर, राम मंदिर ट्रस्ट का यह प्रयास अयोध्या को केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक चेतना के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक साक्ष्यों की वापसी और उनका सार्वजनिक प्रदर्शन न केवल अतीत को सम्मान देने का कार्य होगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा।